महेन्द्र कुमार उपाध्याय बदलता स्वरूप अयाेध्या। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ काठिया मंदिर वासुदेवघाट में चल रहे नव दिवसीय श्रीरामकथा का पूर्णाहुति संग समापन हुआ। नव दिवसीय अमृतमयी श्रीरामकथा के अंतिम दिवस राष्ट्रीय कथाव्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने भक्तजनाें काे रसास्वादन कराते हुए कहा कि यह मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की पावन जन्मभूमि है। जहां भगवान श्रीराम ने अवतार लेकर सबका कल्याण किया। प्रभु श्रीराम ने लाेगाें काे मर्यादित जीवन जीना सिखाया। उन्होंने पूरी दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाया। भगवान श्रीराम जैसा कोई नही है। आज सारा संसार प्रभु श्रीराम का गुणगान करता है। पांच सौ वर्षों के लंबे संघर्ष बाद श्रीरामलला सरकार दिव्य, भव्य, नूतन मंदिर में विराजमान हुए। जाे हम सबके लिए खुशी और गर्व की बात है। अयाेध्यापुरी सप्तपुरियाें में सर्वश्रेष्ठ है। जाे सप्तपुरियाें में मस्तक के समान है। अयाेध्यापुरी काे साताें पुरियाें में मस्तक कहा गया है। अयाेध्या की बड़ी ही महिमा है। इससे पहले मुख्य यजमान पदम चंद्र शर्मा, उनके परिजनों एवं तीर्थ पुराेहित समाज ने व्यासपीठ की भव्य आरती उतारी। कथा के समापन पर साधु-संत और भक्तजनाें काे प्रसाद वितरित किया गया। श्रीरामकथा में राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, बिहार, झारखंड, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, अंबेडकरनगर, मथुरा, आगरा, लखनऊ आदि जगहाें के भक्तजन सम्मिलित हुए। इसके अलावा श्रीरामकथा में भारत में बसे सभी तीर्थ पुराेहिताें का आगमन हुआ। सभी ने कथा का श्रवण कर अपना जीवन धन्य बनाया। इसके उपरांत तीर्थ पुरोहितों की बैठक हुई। बैठक में समाज के उत्थान हेतु चर्चा की गई, जिसकी अध्यक्षता श्रीअयोध्या तीर्थ पुरोहित धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष राजेश महाराज ने की। उन्होंने तीर्थ पुराेहिताें के उत्थान के लिए अपने सुझाव दिए। बैठक में अयोध्या के सभी संभ्रांत तीर्थ पुरोहित उपस्थित रहे।
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