झूलन उत्सव में आज रंग महल में फूल बगले की झांकी सजाई गई
महेन्द्र कुमार उपाध्याय बदलता स्वरूप अयोध्या।सावन के साथ आई झूलन उत्सव की बहार झूलन पर विराजे रंग महल सरकार । रामनगरी में सावन के साथ झूलन उत्सव की बहार आ गई है नगरी के अन्य मंदिरों में जहां सावन शुक्ल पक्ष की विभिन्न तिथियां से पूर्णिया तक आराध्य को झूलन उत्सव पर स्थापित किया जाता है वही मधुर उपासना परंपरा की प्रधान पीठ रंग महल में सावन के पूर्व संध्या से ही आराध्या हिंडोले पर विराजमान हो गए है के जुनून उत्सव की शान भी निराली है रंग महल में अवध बिहारी बिहानी के नाम से स्थापित श्री और सीता की युगल विग्रह सहित भारत मांडवी लक्ष्मण उर्मिला तथा शत्रुघ्न सुकृति के भी युगल विग्रह हिंडोले पर विराजमान होते हैं उन मंदिरों के एक हिंडोले में विपरीत यहां चार हिंडोले सस्ते हैं समझ मजे गायको की टोली अचार पीड़ित पदों से आराध्या को पूरे भाव और ले से ले जाने का प्रयत्न करते हैं प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी रंग महल पीठाधीश्वर रामचरण दास के संयोजन में यहां का झूलन उत्सव आराध्या के साथ संत श्रद्धालुओं को भी मोहित कर रहा है महंत रामशरण दास पूरे समर्पण और दायित्वुद्ध के साथ उत्सव का संयोजन कर रहे हैं वह यह कहते हैं उत्सव की भक्ति की पूंजी है और वह इसके साथ आराध्या की ओर बढ़ता है जीवन में हल्का सा भीचिकन शिकायत बताती है कि हमारा विश्वास टूटा नहीं है और उत्सव बताता है कि हम उसके साथ परम आनंद की अनुभूति कर रहे हैं करीब ढाई सौ वर्ष पूर्व रंग महल की स्थापना महान मधुर उपासक संत सरयू शरण ने की थी और श्री राम तथा सीता सहित उनके युग के अनेक पत्रों को सनातन शाश्वत मानते हुए युवराज एवं राम विवाह उत्सव जैसे उत्सव को नया आयाम दिया है मन्दिर के महंत राम शरण दास जी महराज ने बताया की आज रंग महल में फूल बगले की झांकी जाइए गई है जिसमे भगवान को फूलों का सिंगार कर झूला झुलाया जा रहा है ये एक झाकी की सरुप है इसके बाद रंग महल में गलवाइया झाकी की जाती है जिसमे भगवान को गले से गले मिला कर झूला झुलाया जाता यह झांकी आने वाली एकादशी के दिन भक्तों को देखने को मिलेगी झांकी।
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