बदलता स्वरूप गोण्डा। आधुनिक मशीनी युग में बच्चों को मंदिर में प्रभु दर्शन एवं धार्मिक पूजा संस्कार का ज्ञान होना जरूरी है। नहीं तो आने वाली युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति की ओर विमुख हो रही है। हमें समय रहते बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ धार्मिक संस्कारों का ज्ञान भी धार्मिक पाठशाला में भेजकर सिखाना होगा, तभी सुसंस्कारित नैतिक ईमानदार समाज की परिकल्पना साकार होगी। बच्चे बुजुर्गों का एवं अपने माता-पिता का आदर करना भी सीखेंगे। यह बात सेंट जेवियर्स स्कूल मालवीय नगर की प्रधानाचार्या जीन आनंद क्लास 3 के बच्चों को गुरुद्वारा एवं हनुमानगढ़ी मंदिर ले जाकर धार्मिक और विभिन्न सांस्कृतिक स्थलों के महत्व को बताते हुए कही। गुरुद्वारे में छात्रों को सिख धर्म के संस्थापक गुरु गोविंद सिंह एवं गुरु नानक देव के जीवन एवं उनके बलिदान के बारे में उनकी शिक्षा के बारे में बच्चों को जानकारी दी। इसके साथ गुरुद्वारा कमेटी ने वहां की प्रधानाचार्या को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया, इसके पश्चात हनुमानगढ़ी में बच्चों को ले जाकर हिंदू धर्म के रीति रिवाज के बारे में जानकारी दी गई । इस अवसर पर शिक्षिका दर्पण कालिया, रजिया खातून, गौरव उपाध्याय एवं प्रशांत सिंह की सहभागिता रही।
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