बदलता स्वरूप गोंडा। बाल श्रम के रोकथाम के लिए सरकार द्वारा समय समय पर विभिन्न योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन ढाक के तीन पात वाली कहावत है, जब भी बाल श्रम रोकने के लिए अभियान चलाए जाते हैं उस समय सिर्फ अधिकारियों द्वारा होटलों व गिने चुने दुकानों पर दबिश देकर मामले को इति श्री कर दी जाती है। लेकिन पूरे देश के लगभग सभी शहरों में कुछ ऐसे भी बच्चे हैं जो करतब दिखाकर लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। पढ़ने लिखने, खेलने की उम्र में नन्हें नन्हे पांव के सहारे परिवार चलाने को मजबूर नौनिहाल दो वक्त की रोटी तलाश रहे हैं। प्रशासन दिखाने को होटलों मे दुकानों पर बच्चों को तलाश करती है। आये दिन दबिशें देती हैं। परन्तु सच्चाई उसके विपरीत हैं। जो समाज के लिए गंभीर विषय हैं। जनता को और जागरूक होना पड़ेगा।
इन बच्चों पर भी प्रशासन दे ध्यान पढ़ने की उम्र में करतब दिखाकर लोगों का करते हैं मनोरंजन
बदलता स्वरूप गोंडा। बाल श्रम के रोकथाम के लिए सरकार द्वारा समय समय पर विभिन्न योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन ढाक के तीन पात वाली कहावत है, जब भी बाल श्रम रोकने के लिए अभियान चलाए जाते हैं उस समय सिर्फ अधिकारियों द्वारा होटलों व गिने चुने दुकानों पर दबिश देकर मामले को इति श्री…

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