*बदलता स्वरूप गोंडा। जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने जनपद के सभी 127 गौ आश्रय स्थलों की स्थिति में सुधार के लिए बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी द्वारा 70 जिलास्तरीय अधिकारियों के माध्यम से इन गौ आश्रय स्थलों की जांच कराई गई। तीन दिन में एक-एक गौ आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। अब, जिलाधिकारी ने इनकी रिपोर्ट में अंकित कमियों को दूर करने के लिए सभी खंड विकास अधिकारी एवं पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देश जारी किए गए हैं। इन्हें सुधार के लिए 16 जुलाई तक का समय दिया गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान सभी खामियों को दूर करना होगा। 18 जुलाई को यह टीम दोबारा जांच करेंगी। उसमें अगर कोई कमी पाई गई तो वहां के प्रभारी सहित संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा पशु चिकित्साधिकारी के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी। जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने बीते दिनों जनपद में निराश्रित गोवंशों के संरक्षण हेतु स्थापित स्थायी एवं अस्थायी गौ आश्रय स्थलों पर धारण क्षमता के सापेक्ष संरक्षित गोवंश, उनकी देखरेख तथा यहां पर की गई व्यवस्थाओं के सत्यापन के आदेश दिए थे। उपजिलाधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, नायब तहसीलदार जैसे जनपद स्तरीय अधिकारियों के माध्यम से यह सत्यापन कराया गया है। सत्यापन में सामने आया है कि कई आश्रय स्थलों में जलभराव की समस्या है। पानी की निकासी का उपयुक्त प्रबंध न होने से यहां संरक्षित गोवंश को अत्यधिक समस्या हो रही है। भूसा भीगने व चारे की समस्या उत्पन्न होने, प्रकाश व्यवस्था एवं बाउंड्रीवॉल न होने जैसे बिंदु सत्यापन में सामने आए हैं।जिलाधिकारी नेहा शर्मा की ओर से समस्त खंड विकास अधिकारियों एवं पशु चिकित्सा अधिकारियों को इन सभी कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी रिपोर्ट 16 जुलाई तक उपलब्ध करानी होगी। 18 जुलाई को दोबारा सत्यापन होगा। इसकी रिपोर्ट 19 जुलाई तक प्रस्तुत करनी होगी।
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