महेन्द्र कुमार उपाध्याय
बदलता स्वरूप अयोध्या। “झूला झूलैं सियाराम झुलावैं सखियां..। आई तीज सुहावन प्यारी, सिया जू पहिरी लहरिया साड़ी। झूलन पिया के संग सिधारी जनक लली..” यह बाेल हैं अयाेध्याधाम के मंदिरों में चल रहे श्रावण झूलनाेत्सव का। रामनगरी के मठ-मंदिरों में झूलन महाेत्सव अपने उफान पर पहुंच चुका है। लाखाें भक्तगण प्रतिदिन युगल सरकार के झूलन झांकी का दर्शन कर जीवन धन्य बना रहे हैं।
यहां की सिद्धपीठ श्रीविजय राघव कुंज गुजराती मंदिर में झूलन महोत्सव का उल्लास देखते हुए बन रहा है। जहां उत्सव की चकाचौंध में पूरा मंदिर प्रांगण डूबा हुआ है। मठ में सायंकाल झूलन की सुभव्य झांकी सज रही है। युगल सरकार के झूलन महोत्सव का दर्शन कर भक्तजनाें अपना जीवन सार्थक बनाया। आश्रम में देररात झूलनाेत्सव का कार्यक्रम चल रहा है। युगल सरकार को झूला झुलाते हुए श्रीविजय राघव कुंज गुजराती मंदिर पीठाधीश्वर महंत नंद नंदनम शरण महाराज आनंदित एवं भावविभोर हैं। झूलनाेत्सव की खुशी में महंत द्वारा कलाकारों को भेंट स्वरूप न्याैछावर व विदाई भी दी जा रही है। कहा कि युगल सरकार के झूलनाेत्सव की परंपरा प्राचीनकाल से चली आ रही है। जिसका निर्वाहन हम साधु-संत, भक्तजन आज भी कर रहे हैं। सबसे पहले प्रभु श्रीराम ने किशाेरी जी संग मणिपर्वत के बाग में झूला झूला था। तब से झूलन महोत्सव की परंपरा चली आ रही है। युगल सरकार के झूलन झांकी का दर्शन करने से अपार पुण्य की प्राप्ति हाेती है। व्यक्ति हमेशा के लिए आवागमन से मुक्त हाे जाता है। इसी तरह मणिरामदास छावनी, रंगमहल, रामवल्लभाकुंज, वेद मंदिर, लक्ष्मणकिला, दशरथ महल, जानकीघाट बड़ास्थान, सियारामकिला, राजगाेपाल मंदिर, सदगुरु सदन आदि मंदिरों में भी झूलनाेत्सव का उल्लास चरम पर है।
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