बदलता स्वरूप बिहार, मधुबनी। जिले के फुलपरास प्रखंड का सिसवार गांव में चोरी डकैती आदि घटनाओं में बढ़ोतरी को लेकर क्षेत्रीय लोगों द्वारा अनेक अभियान शुरू करने के साथ बड़ी आंदोलन की तैयारी किया जा रहा है। नौ पंचायतों सहित डेढ़ लाख कि आबादी बाले इस झेत्र के ग्रामीणों द्वारा वर्षों से सिसवार थाना की मांग कि जा रही है। वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा गांव को अनदेखी करने का आरोप भी क्षेत्रीय लोगों के द्वारा लगाया जा रहा है। क्षेत्रीय विधायक से अनुरोध करने पर उन्होंने कहा कि महिनों पश्चात पहले ही विधानसभा सचिव को पत्र लिखकर अनुरोध किया जा चुका है और उसकी प्रतिलिपि जल्द उपलब्ध करा कर उस पर संज्ञान लेते हुए कारवाई करने का आश्वासन मिला है। लेकिन क्षेत्रीय सांसद द्वारा कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर लोगों में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्रीय सांसद द्वारा यहां के लोगों से मिलने व वार्तालाप करने से भी कतराते हैं, यहां तक कि वे ग्रामीणों द्वारा संचालित व्हाट्सएप ग्रुप से भी अपने आप को अलग थलग कर लिया।ग्रामीण नेता श्री हितेंद्र ठाकुर नूनू ने बताया कि पैंतीस वर्ष पूर्व 1979 में रघुनाथ झा जब विधायक थे तब बिहार बिधान सभा में सिसवार थाना बनाने के लिये प्रश्न किया गया था। पश्न आलोक के बाद मधुबनी एस पी से थाना बनाने का प्रस्ताव मांगा गया था । उसके बाद मधुबनी एस पी रंजीत सिन्हा प्रस्ताव बना के सरकार को भेजा था परन्तु सरकार द्वारा किसी कारण बस उस पर अभी तक ध्यान नहीं दिया। साथ ही श्री ठाकुर ने इसको लेकर सहयोग व कोई हल जल्द परिणाम निकालने का प्रतिबद्धता दी है।ग्रामीण व प्रवासी युवा शक्ति के सदस्यों शंकर झा, आनंद झा,अखिलेश झा, ई. आर के जायसवाल (समाजसेवी), सीए मुकेश झा, सीए सीतेश झा, सोनू झा, गोविंद झा, प्रजेश झा, हरीशंकर झा, ब्रह्ममदेव झा, पतंजलि झा, विनय झा, दीपक मिश्रा, मुकुंद झा, सचिन भगत, रेजउल्लाह, मुमताज, राहुल राय मुरारी झा व एस रंजन झा ने सामुहिक रूप से कहना है कि यहां बढ रही अप्रत्याशित घटनाएं क्षेत्रीय व ग्रामीण लोगों के साथ साथ व्यापारिक व स्थानीय बैंककर्मी में दहशत व्याप्त है। पिछले कुछ महीनों में दर्जनों लूट पाट, कई भीषण डकैती व गोली काण्ड से लोग घरों से बाहर निकलने में हिचकते हैं, इसलिए यहां एक पुलिस थाना अब बेहद जरूरी हो गया है और हम सभी मिलकर गांधी जयंती के दिन इस हिंसक गतिविधियों पर लगाम लगाने को लेकर दो अक्टूबर से सोसल मीडिया से अपना अभियान शुरू करने का आव्हान किया है और इसपर कोई जल्द निष्कर्ष नहीं मिलने पर महा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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