महेन्द्र कुमार उपाध्याय अयोध्या। श्रीमती बिंदु त्रिपाठी के प्रथम पुण्यतिथि उनके पुण्य स्मृति में नया घाट स्थित श्री राम कथा पार्क में मूर्धन्य पंडित उमापति त्रिपाठी महाराज के आशीर्वाद से तीन कलश तिवारी मंदिर धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट अयोध्या के सौजन्य से सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा तृतीया दिवस की बेला में जगतगुरु रामानुजाचार्य डॉ स्वामी राघवाचार्य महाराज ने भागवत कथा के सत्र में राजा परीक्षित के समक्ष सुखदेव जी ने भगवान के विराट स्वरूप और वराह अवतार की महिमा का विस्तृत वर्णन किया। इस कथा में भगवान विष्णु के वराह अवतार के रूप में हिरणाक्ष का वध कर पृथ्वी का कल्याण कैसे किया स्वामी जी विस्तार से बताया।उन्होंने बताया कि भगवान का विराट स्वरूप समस्त ब्रह्मांड का प्रतीक है, जिसमें सारा संसार समाहित है। भगवान के विराट शरीर में सम्पूर्ण सृष्टि, पृथ्वी, आकाश, जल, अग्नि और वायु का स्थान है। इस विराट स्वरूप को देख कर राजा परीक्षित अत्यंत प्रभावित हुए और भगवान की अनंत शक्तियों का अनुभव किया। जगतगुरु महराज ने बताया कि जब पृथ्वी को असुर हिरणाक्ष ने समुद्र के भीतर छिपा लिया था, तब भगवान विष्णु ने वराह (सूअर) रूप धारण किया और हिरणाक्ष का वध किया। वराह रूप में भगवान ने समुद्र की गहराइयों में जाकर पृथ्वी का उद्धार किया और उसे अपने दांतों पर उठा कर पुनः उसकी जगह पर स्थापित किया। इस प्रकार भगवान ने पृथ्वी का कल्याण कर समस्त जीवों की रक्षा की।जब-जब संसार में धर्म की हानि होती है और अधर्म का वर्चस्व बढ़ता है, तब भगवान अवतार लेकर पृथ्वी की रक्षा करते हैं। कथा सुनते समय राजा परीक्षित ने भगवान की महिमा का अनुभव किया और उनकी भक्ति में लीन हो गए।कथा शुभारंभ के पहले पंडित शिवेश्वरपति त्रिपाठी, पंडित श्रीशपति त्रिपाठी और महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी व्यास पीठ और व्यास पीठ पर विराजमान जगतगुरू स्वामी डॉ राघवाचार्य महाराज का पूजन अर्चन किया। कथा के विश्राम मेला पुनः आरती उतारी के और प्रसाद वितरण किया गया। आज की कथा में सैकड़ो की संख्या में कथा प्रेमी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का स्वागत रूद्रेश त्रिपाठी ने किया।
Badalta Swaroop | बदलता स्वरुप Latest News & Information Portal