इसरार अहमद
बदलता स्वरूप श्रावस्ती। जनपद मे सोमवार रात तेज़ हवाओ के साथ बरसात हुई। इस बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल बारिश की भेंट चढ़ गई है।धान की फसले तैयार थी कटाई का समय आ चुका था। किसान फसल सूखने का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान बेमौसम बारिश ने मेहनत के साथ ही उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। इतना ही नहीं कही-कहीं खेतो मे कटी पड़ी फसल भी बर्बाद हो गई है। बारिश के बाद फसल देखने पहुंचे किसान खेतो मे पानी भरा देख सिर पकड़कर बैठ गए।
जानकारी के अनुसार मौसम में बदलाव का सर्वाधिक नुकसान किसानों को हुआ है। कटने के लिए खेत मे तैयार धान की फ़सल को सर्वाधिक नुकसान हुआ है। आलू, सरसों की खेती भी इससे प्रभावित हुई है। सरसों की फसल भी नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। आलू की बोआई करने वाले किसान भी परेशान हैं। सबसे अधिक दिक्कत पट्टे या बटाई पर खेती करने वालों को हुआ है। खेतों में पानी भरने से किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं।
तहसील भिनगा क्षेत्र के ब्लन्तपुर गाँव के निवासी रिजवान का कहना है कि 55 बीघे मे धान की फ़सल लगी थी। इस बार अच्छी पैदावार होने की सम्भावना थी।लेकिन अचानक तेज़ हवाओ के साथ आयी बारिश ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया फसले खेत मे गिरकर भीग गयी है।अब मुनाफा तो दूर लागत भी निकलना मुश्किल हो गया है। मो. उमर ने 15 बीघे मे धान की फ़सल लगाई थी और मन्नान ने 12 बीघे मे धान की फ़सल लगाई थी यह फसले अब जमींदोज होकर भीग गयी हैं वहीं दस बीघा मे धान बोने वाले मो. अशरफ भी परेशान है।उनकी समझ मे नहीं आ रहा है कि वह अब क्या करें।
वहीं तहसील जमुनहा क्षेत्र के बालापुरा रतैहा के किसान अशोक की भी 10 बीघा धान की फ़सल बारिश की जद मे आ गयी जबकि बनगईं मे शिवकुमार, उमाशंकर, चंद्र भूषण, महेश प्रसाद एवं छेदन खान व शेशराज कश्यप, श्रीचंद्र तिवारी, हरिराम, प्रेमकुमार वर्मा सहित अन्य कई किसानो की कुल 40 बीघे फ़सल जमींदोज होकर भीग गयी है।ऐसे मे 50 प्रतिशत नुकसान की आशंका है। जबकि इकौना क्षेत्र यह बेमौसम बारिश बेअसर रही।
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