महेन्द्र कुमार उपाध्याय
बदलता स्वरूप अयोध्या। अयोध्या में इस समय डेंगू, मलेरिया, और टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है, जिससे सैकड़ों लोग प्रभावित हो रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, और पूरे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव है। इस कठिन परिस्थिति में, जिला श्रीराम अस्पताल के डॉक्टर इंद्रभान विश्वकर्मा ने अपनी समर्पित सेवा और निरंतर प्रयासों से स्थानीय जनता के लिए एक नई उम्मीद का संचार किया है। डॉक्टर इंद्रभान विश्वकर्मा जिस प्रकार से अपनी सेवा में जुटे हुए हैं, उससे अयोध्या की जनता उन्हें आधुनिक समय के ‘संजीवनी प्रदानकर्ता’ के रूप में मानने लगी है। हनुमान जी ने जिस प्रकार लक्ष्मण जी के जीवन को संजीवनी बूटी से पुनर्जीवित किया था, ठीक उसी भावना के साथ डॉक्टर इंद्रभान भी बीमार लोगों की जान बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। उनके निःस्वार्थ समर्पण और कठिन परिश्रम ने अयोध्या की जनता को राहत का अनुभव कराया है।डॉक्टर इंद्रभान न केवल मरीजों का उपचार कर रहे हैं, बल्कि बीमारियों के बारे में जागरूकता फैलाने, उचित देखभाल के उपायों को साझा करने, और मरीजों को मानसिक रूप से प्रोत्साहित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनकी यह सेवा भावना और समर्पण अयोध्या के लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बन गई है जनता की ओर से यह अपील भी की जा रही है कि जिला प्रशासन इस संकट से निपटने के लिए और ठोस कदम उठाए। डॉक्टर इंद्रभान जैसे चिकित्सकों का साथ देते हुए प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाया जाए और बीमारियों के रोकथाम के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।इस कठिन समय में, डॉक्टर इंद्रभान विश्वकर्मा ने यह साबित कर दिया है कि समाज की सेवा में समर्पित एक चिकित्सक ही असली नायक होता है। उनकी यह सेवा भावना पूरे शहर के लिए एक प्रेरणा है, और उनके प्रयासों से अयोध्या की जनता को संजीवनी जैसी राहत मिल रही है।अयोध्या के लोग डॉक्टर इंद्रभान विश्वकर्मा के इस योगदान की सराहना करते हैं और जिला प्रशासन से अपील करते हैं कि इस महामारी को नियंत्रित करने के लिए और प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि अयोध्या एक बार फिर स्वस्थ और सुरक्षित बन सके।
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