बदलता स्वरूप गोंडा। धीरे-धीरे बढ़ रही सर्दियों को लेकर जानकारी साझा करते हुए अधीक्षक डा. आशुतोष शुक्ला ने कहा कि अब दिन धीरे धीरे छोटा होने लगा है। सर्दियों में दूर दराज ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को सीएचसी आने में समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में ठंड के कारण रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती है। रक्तचाप बढ़ने लगता है। स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। सही उपाय अपनाकर इसे बचा जा सकता है। बचाव के लिए रक्तचाप नियंत्रित रखना पड़ता है। नियमित रूप से रक्तचाप की जांच समय-समय पर करानी चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक का मुख्य कारण हो सकता है। जिससे बचाव के लिए सर्दियों में गर्म कपड़े पहनना चाहिए , जिससे पूरे शरीर को ठंडक से बचाया जा सके। फाइबर युक्त और पोषक आहार का सेवन नियमित समय से करना चाहिए। नमक , तैलीय भोजन की मात्रा कम करनी चाहिए। हल्के-फुल्के व्यायाम सुबह शाम करने चाहिए। धूम्रपान और शराब से बचना चाहिए , यह आदतें रक्तचाप और हृदय पर खतरा बढ़ाती हैं , जिससे शरीर में कई समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। प्यास लगने पर मरीज को समय-समय पर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। ठंड में कम पानी पीने से रक्त गाढ़ा हो सकता है। जो स्ट्रोक का कारण बन सकता है। मानसिक तनाव भी स्ट्रोक का कारण बन सकता है। इसके बचाव के लिए मेडिटेशन और आरामदायक गतिविधियों को अपनाना चाहिए। लंबे समय तक ठंड के संपर्क में रहने से नाक बहना या नाक से रक्तस्राव जैसे विभिन्न लक्षणों की संभावनाएं बढ़ जाती है स्थिति ऐसी स्थिति में चिकित्सक से परामर्श ले ।सर्दियों में सावधानियो का पालन करने से स्ट्रोक के खतरे कम हो सकते हैं। हल्की समस्या उत्पन्न होने पर ही चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। नियमित रूप से गर्म तरल पदार्थ का सेवन करें यह ठंड के प्रतिरोध के लिए शरीर की गर्मी को बनाए रखेगा तेल पेट्रोलियम जेली या बॉडी क्रीम का प्रयोग कर नियमित रूप से अपनी त्वचा को नर्म रखें।
