बदलता स्वरूप ब्यूरो
कर्नलगंज-गोंडा। नगर के गुड़ाही बाजार स्थित श्री रामलीला भवन में मंगलवार की रात्रि में सती वृंदा, नारद मोह, सतरुपा वर प्राप्ति की लीला का मंचन बड़े ही सुंदर ढंग से किया गया। जिसमें कमेटी के पदाधिकारियों व कलाकारों के द्वारा लीला का मंचन किया गया।
रामलीला कार्यक्रम के दौरान सबसे पहले सतीवृन्दा की लीला दिखाई गई। जिसमें दिखाया गया कि जालंधर और भगवान शिव के बीच घनघोर युद्ध हुआ लेकिन भगवान शिव जी जालंधर को परास्त नहीं कर पाए। तब त्रिदेवों ने जालंधर को परास्त करने की योजना बनाई, जिसमें नारद मुनि ने बताया कि अगर जालंधर की पत्नी वृंदा का सतीत्व भंग हो जाए तो जालंधर को पराजित किया जा सकता है। जिसके बाद भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण कर सती वृंदा का सतीत्व भंग कर दिया। उसी दौरान जालंधर और भगवान शिव के बीच हुए युद्ध में भगवान शिवजी ने जालंधर का वध करके देवताओं को जालंधर के अत्याचार से मुक्त करा दिया। जिसके बाद वृंदा को भगवान विष्णु के बारे में पता होने पर उसने भगवान विष्णु को श्राप दे दिया। जिस पर भगवान विष्णु ने वृंदा को अगले जन्म में तुलसी के रूप में स्वयं शालिग्राम पिता और परिवार के रूप में प्राप्त होने का वरदान देते हैं। उसके बाद नारद मोह की लीला का सचित्र वर्णन किया गया। जिसमें दिखाया गया कि नारद मुनि मोह वस भगवान विष्णु के पास जाकर अपने विवाह का प्रस्ताव देते हैं। जिस पर भगवान विष्णु नारद मुनि को वानर का रूप देकर स्वयंवर में भेज देते हैं। जिसमें स्वयं भगवान् विष्णु भी सांभर में पहुंचते हैं, जहां राजा सूर्य निधि की पुत्री भगवान विष्णु को देख उन्हीं के गले में माला डाल देती है। लेकिन स्वयंवर में नारद मुनि का अपमान होता है जिस पर वह अपमानित व क्रोधित होकर भगवान विष्णु के पास आते हैं और उन्हें भी श्राप दे देते हैं। इसके बाद अपनी गलती का एहसास होने पर नारद मुनि पछतावा कर भगवान विष्णु से क्षमा मांगते हैं।
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