बदलता स्वरूप गोण्डा। आज एक ‘महान समाज सुधारक’ चौधरी नर्सिंग पटेल अज्ञानी का पराभव हो गया, यह संजोग है कि 15 अगस्त 1960 को वे पैदा हुए थे, 40 वर्षों से पिछड़ों एवं अति पिछड़ों को आगे लाने की लड़ाई लड़ते रहे फुले, पेरियार, अंबेडकर की विचारधारा के ट्रू सेंस समाज सुधारक थे। वे ईमानदार थे चरित्र व अनुशासन के धनी थे उनकी वाणी सारगर्वित थी, सत्ता एवं समाज उन्हें सुधारक के रूप में स्वीकार करता था। वे हीरालाल रामनिवास लाल कॉलेज खलीलाबाद से हिंदी साहित्य में परास्नातक थे। उन्होंने राजनीति में भ्रष्टाचार चोरी हिंसा पर कविताएं लिखी राजनीति में प्रवेश से परहेज कर किसी पार्टी की नुमाइंदी नहीं की, गरीब, कमजोरों की आवाज थे। सरकार ने उन्हें सम्मान स्वरूप रेल बोर्ड का भाषा परिषद का सदस्य बनाया था गोरखपुर रेडियो स्टेशन में भोजपुरी चयन समिति में वे अस्थाई सदस्य भी थे। ये पद आर्थिक लाभ के नहीं थे। 15 अगस्त 1960 को ग्राम बंधवा बघौली संत कबीर नगर में एक अति सामान्य कृषक कुर्मी परिवार में पैदा महान समाज सुधारक ने अपने पीछे अपनी पत्नी एवं चार बच्चों का परिवार छोड़ा हैं उनके दो विवाहित बेटों में एक बेटा रेलवे में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है दूसरा उत्तर प्रदेश के किसी विभाग में मानदेय कर्मचारी है दो अविवाहित बेटियों में एक बेटी एमपी इंटर कॉलेज से पॉलिटेक्निक पूरी कर प्राइवेट कॉलेज से बीटेक कर रही है, दूसरी बेटी ला ग्रेजुएट है, ऐसी स्थिति में सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि उस महान समाज सुधारक की बेटियों की शिक्षा का खर्च उठाएं। उक्त विचार नन्द किशोर वर्मा, टैक्स एडवोकेट, अध्यक्ष छत्रपति शाहूजी जी महाराज संस्थान, गोंडा ने व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मृत्यु से मुझे बेहद कष्ट है समझ में नहीं आ रहा मैं क्या करूं? उन्हें पुनर्जीवित करने का कोई रास्ता नहीं है, सिवाय उनके पद चिन्हों पर चलने के। राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ में इलाज के दौरान उनको एक झलक देखने मैं दो बार गया परंतु उनसे किसी को मिलने की मनाई थी मैं भाभी जी एवं बेटे अजय’ विजय’ से मिला।
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