महेन्द्र कुमार उपाध्याय बदलता स्वरूप अयोध्या। श्रावण शुक्ल सप्तमी तिथि पर चक्रवर्ती सम्राट महाराजा दशरथ राजमहल बड़ास्थान में संस्थापक महंत बाबा राप्रसादाचार्य महाराज की जयंती हर्षाेल्लास पूर्वक मनाई गई। रविवार को जयंती महाेत्सव पर रामनगरी के संत-महंतों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया। सर्वप्रथम मंदिर में विराजमान धनुषधारी भगवान का पूजन-अर्चन किया गया। उसके बाद भाेग लगाकर दिव्य आरती उतारी। तदुपरांत आश्रम परिसर में स्थापित पूर्वाचार्य महंत बाबा राप्रसादाचार्य महाराज की प्रतिमा पर वैदिक मंत्राेच्चारण संग पूजन-अर्चन, आरती किया गया। फिर संताें ने पूर्वाचार्य काे श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया। संताें ने उनके कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। पूर्वाचार्य के जयंती महाेत्सव काे अपना संयाेजन प्रदान करते हुए दशरथ महल के वर्तमान विन्दुगद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य ने कहा कि स्वामी राप्रसादाचार्य महाराज विलक्षण प्रतिभा के धनी संत थे। संतत्व ताे उनमें देखते ही झलकता था। वह गाै और संत सेवी रहे। उन्होंने सेवा काे ही अपना धर्म माना और उसी काे अंगीकार किया। जीवन भर सेवा प्रकल्पों से जुड़े रहे। तीन सौ वर्ष पूर्व महाराजश्री ने मां जानकी की कठिन तपस्या कर उनकी कृपा प्राप्त की। श्रीजानकी ने महाराज श्री को स्वयं अपने पैर के अंगूठे से तिलक लगाकर आशीर्वाद प्रदान किया था। उन्होंने चित्रकूट अयोध्या के सीताकुंड, वर्तमान दशरथ महल स्थित बरगद के पेड़ के नीचे कठिन तप कर श्रीसीताराम की कृपा प्राप्त की। विंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य महाराज के कृपापात्र मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास ने पधारे हुए संत-महंताें का स्वागत-सत्कार किया। जयंती महाेत्सव पर जानकीघाट बड़ास्थान के महंत जन्मेजय शरण, बड़ाभक्तमाल महंत स्वामी अवधेश कुमार दास, पत्थर मंदिर महंत मनीष दास, रामकचेहरी महंत शशिकांत दास, श्रीरामाश्रम पीठाधीश्वर महंत जयराम दास, यतिराज भवन महंत अर्जुन दास, दास, नागा रामलखन दास, वकील बाबा, सुदामा दास, मायाराम दास, स्वामी गयाशरण, कविराज दास आदि संत-महंत, भक्तजन उपस्थित रहे।
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