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कोटही मंदिर परिसर का खेल मैदान उपेक्षा का शिकार, अव्यवस्था पर आंसू बहाने को मजबूर

इसरार अहमद बदलता स्वरूप श्रावस्ती। जनपद के ब्लॉक जमुनहा के गुरजी गंज किला परिसर में स्थित खेल मैदान इन दिनों अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते इस खेल मैदान की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। चारों ओर उगी झाड़ियों और क्षतिग्रस्त कटीले तारों के कारण यह…

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इसरार अहमद

बदलता स्वरूप श्रावस्ती। जनपद के ब्लॉक जमुनहा के गुरजी गंज किला परिसर में स्थित खेल मैदान इन दिनों अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते इस खेल मैदान की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। चारों ओर उगी झाड़ियों और क्षतिग्रस्त कटीले तारों के कारण यह मैदान अब आवारा पशुओं का अड्डा बन गया है।जानकारी के अनुसार विकास खंड जमुनहा के ग्राम पंचायत महदेवा सलारपुर में स्थित गुरजी गंज किला के परिसर में कोटही दाई का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर परिसर में पिछले 35 वर्षों से दशहरा का आयोजन होता आ रहा है। वर्ष 2022-23 में मनरेगा योजना के तहत इस परिसर को खेल मैदान में तब्दील कर दिया गया था। इस प्रक्रिया के तहत चारों ओर पिलर और कटीले तार लगाए गए, और फूल-पौधों की क्यारियां भी बनाई गईं। लेकिन, उचित देखभाल के अभाव में यह मैदान उपेक्षित हो गया है। दशहरा मेला आयोजक बच्छराज वर्मा ने बताया कि इस खेल मैदान में साल भर में कई मेलों और अन्य आयोजनों के दौरान लाखों श्रद्धालु आते हैं। खेल मैदान बनने के बाद परिसर सुरक्षित तो हो गया, लेकिन रखरखाव की कमी के चलते इसकी हालत दयनीय हो गई है। मैदान को सुरक्षित करने के लिए लगाए गए पिलरों पर लगे तार खुल चुके हैं और गेट की फाटक भी टूटी हुई है, जिससे आवारा पशु, बकरियां और अन्य जानवर मैदान में विचरण करते रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप मैदान में गंदगी फैली रहती है और इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। स्थानीय लोगों में इस अव्यवस्था के कारण निराशा व्याप्त है। ग्राम पंचायत भी इस खेल मैदान का उचित रखरखाव करने में असफल साबित हो रही है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि मैदान के चारों ओर चारदीवारी बनाई जाए और किनारे-किनारे पौधे लगाए जाएं, तो इस मैदान की बदहाली खत्म हो सकती है और इसकी सुंदरता में वृद्धि हो सकती है। अब यह मामला जिला प्रशासन के ध्यानाकर्षण की मांग करता है, ताकि इस ऐतिहासिक स्थल की दुर्दशा सुधारी जा सके।