*बेटे ने पिता की याद में गढ़ दी* *अमर निशानी, मूर्ति* *अनावरण बना क्षेत्र में चर्चा* *का विषय*
*बेटे ने पिता की याद में गढ़ दी* *अमर निशानी, मूर्ति* *अनावरण बना क्षेत्र में चर्चा* *का विषय*
इंद्रसेन दुबे की पहल को महंत बृज मोहन दास ने बताया ‘पुत्र धर्म’ की मिसाल, बोले—एक पिता की स्मृति से निकला सर्व समाज के लिए संदेश
सुल्तानपुर /कुड़वार। पिता की यादें अक्सर तस्वीरों और स्मृतियों तक सिमट जाती हैं, लेकिन भंडरा परशुरामपुर के मझारी पश्चिम में एक बेटे ने अपने पिता की स्मृति को ऐसी पहचान देने का प्रयास किया, जो वर्षों तक लोगों की आंखों के सामने रहेगी। शुक्रवार शाम स्वर्गीय कपिल देव दुबे की मूर्ति का अनावरण इसी भाव और श्रद्धा के साथ किया गया। आयोजन उनके पुत्र एवं पत्रकार इंद्रसेन दुबे की पहल पर हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा बटोरी।
*अयोध्या से पहुंचे महंत बृज मोहन दास ने मूर्ति का अनावरण किया*। कार्यक्रम में उन्होंने इंद्रसेन दुबे के प्रयास की जमकर सराहना की। महंत ने कहा कि पिता की स्मृति में ऐसा कार्य करना केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि पुत्र धर्म निभाने का एक अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इंद्रसेन दुबे ने अपने पिता की स्मृति को सम्मान देने के साथ-साथ सर्व समाज के सामने एक ऐसा संदेश रखा है, जिसमें संस्कार, सम्मान और अपने पूर्वजों के प्रति कर्तव्य की भावना दिखाई देती है।
मूर्ति अनावरण के दौरान माहौल श्रद्धा और भावुकता से भरा रहा। उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय कपिल देव दुबे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व और सामाजिक जुड़ाव को याद किया। लोगों के बीच इस बात की चर्चा रही कि आज के दौर में जहां पुरानी पीढ़ी की स्मृतियां धीरे-धीरे धुंधली पड़ जाती हैं, वहीं इंद्रसेन दुबे ने अपने पिता की याद को सार्वजनिक स्मृति से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया है।
कार्यक्रम के दौरान महंत बृज मोहन दास ने विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक मुद्दों पर मीडिया से बातचीत की और अपनी राय रखी। उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को समाप्त किए जाने की मांग का समर्थन भी किया।
इस अवसर पर क्षेत्र के सम्मानित पूर्व प्रमुख यशभद्र सिंह ‘मोनू’, भाजपा नेता विकास शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार शिवेंद्र अमिताभ पांडे, नयन बहादुर सिंह समेत तमाम वरिष्ठ समाजसेवी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे।
‘मूर्ति नहीं, पिता की यादों को सम्मान देने की पहल’
स्वर्गीय कपिल देव दुबे की मूर्ति की स्थापना को लोग केवल एक अनावरण कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि एक बेटे की अपने पिता के प्रति श्रद्धा और जिम्मेदारी से जोड़कर देख रहे हैं। इंद्रसेन दुबे की इस पहल ने यह संदेश भी दिया कि माता-पिता की स्मृतियों को सम्मान देना आने वाली पीढ़ियों को संस्कारों से जोड़ने का माध्यम बन सकता है।
कार्यक्रम के बाद क्षेत्र में सबसे अधिक चर्चा इसी बात की रही कि इंद्रसेन दुबे ने पिता की स्मृति को सिर्फ याद नहीं किया, बल्कि उसे एक ऐसी पहचान देने का प्रयास किया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी देख सकें और अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान की सीख ले सकें।
इंद्रसेन दुबे की पहल को महंत बृज मोहन दास ने बताया ‘पुत्र धर्म’ की मिसाल, बोले—एक पिता की स्मृति से निकला सर्व समाज के लिए संदेश
सुल्तानपुर /कुड़वार। पिता की यादें अक्सर तस्वीरों और स्मृतियों तक सिमट जाती हैं, लेकिन भंडरा परशुरामपुर के मझारी पश्चिम में एक बेटे ने अपने पिता की स्मृति को ऐसी पहचान देने का प्रयास किया, जो वर्षों तक लोगों की आंखों के सामने रहेगी। शुक्रवार शाम स्वर्गीय कपिल देव दुबे की मूर्ति का अनावरण इसी भाव और श्रद्धा के साथ किया गया। आयोजन उनके पुत्र एवं पत्रकार इंद्रसेन दुबे की पहल पर हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा बटोरी।
*अयोध्या से पहुंचे महंत बृज मोहन दास ने मूर्ति का अनावरण किया*। कार्यक्रम में उन्होंने इंद्रसेन दुबे के प्रयास की जमकर सराहना की। महंत ने कहा कि पिता की स्मृति में ऐसा कार्य करना केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि पुत्र धर्म निभाने का एक अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इंद्रसेन दुबे ने अपने पिता की स्मृति को सम्मान देने के साथ-साथ सर्व समाज के सामने एक ऐसा संदेश रखा है, जिसमें संस्कार, सम्मान और अपने पूर्वजों के प्रति कर्तव्य की भावना दिखाई देती है।
मूर्ति अनावरण के दौरान माहौल श्रद्धा और भावुकता से भरा रहा। उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय कपिल देव दुबे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व और सामाजिक जुड़ाव को याद किया। लोगों के बीच इस बात की चर्चा रही कि आज के दौर में जहां पुरानी पीढ़ी की स्मृतियां धीरे-धीरे धुंधली पड़ जाती हैं, वहीं इंद्रसेन दुबे ने अपने पिता की याद को सार्वजनिक स्मृति से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया है।
कार्यक्रम के दौरान महंत बृज मोहन दास ने विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक मुद्दों पर मीडिया से बातचीत की और अपनी राय रखी। उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को समाप्त किए जाने की मांग का समर्थन भी किया।
इस अवसर पर क्षेत्र के सम्मानित पूर्व प्रमुख यशभद्र सिंह ‘मोनू’, भाजपा नेता विकास शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार शिवेंद्र अमिताभ पांडे, नयन बहादुर सिंह समेत तमाम वरिष्ठ समाजसेवी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे।
‘मूर्ति नहीं, पिता की यादों को सम्मान देने की पहल’
स्वर्गीय कपिल देव दुबे की मूर्ति की स्थापना को लोग केवल एक अनावरण कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि एक बेटे की अपने पिता के प्रति श्रद्धा और जिम्मेदारी से जोड़कर देख रहे हैं। इंद्रसेन दुबे की इस पहल ने यह संदेश भी दिया कि माता-पिता की स्मृतियों को सम्मान देना आने वाली पीढ़ियों को संस्कारों से जोड़ने का माध्यम बन सकता है।
कार्यक्रम के बाद क्षेत्र में सबसे अधिक चर्चा इसी बात की रही कि इंद्रसेन दुबे ने पिता की स्मृति को सिर्फ याद नहीं किया, बल्कि उसे एक ऐसी पहचान देने का प्रयास किया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी देख सकें और अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान की सीख ले सकें।



