सवाल पूछिए, लेकिन संवाद बनाए रखिए : डॉ. सूर्यपाल सिंह
बदलता स्वरूप
गोण्डा। पत्रकारिता का काम सवाल पूछना है, लेकिन सवाल के साथ संवाद भी जरूरी है। पत्रकारिता, पुलिस और समाज के बीच आपसी विश्वास एवं बेहतर समन्वय लोकतंत्र को मजबूत करने की अहम कड़ी है। पत्रकार और पुलिस एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाने वाले महत्वपूर्ण पक्ष हैं। दोनों के बीच संवाद बना रहना चाहिए। यह बात राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार डॉ. सूर्यपाल सिंह ने जिला पंचायत सभागार में आयोजित गोष्ठी में कही।
गोष्ठी का विषय ‘पत्रकारिता, पुलिस एवं समाज के मध्य समन्वय तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की सुदृढ़ता’ रहा। डॉ. सूर्यपाल सिंह ने कहा कि पत्रकार का दायित्व समाज की समस्याओं को सामने लाना और सवाल करना है, जबकि पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दोनों के कार्यक्षेत्र अलग-अलग हैं, लेकिन उद्देश्य समाज का हित है। इसलिए संवाद और सहयोग की भावना बनी रहनी चाहिए।
आगे कहा कि “सवाल पूछिए, लेकिन संवाद बनाए रखिए और अपनी बात कहने के साथ सामने वाले की बात भी सुनिए।” उन्होंने इसे स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान बताया।
सवाल, असहमति और संवाद लोकतंत्र की ताकत
कार्यक्रम की अध्यक्षता उपजा वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जीसी श्रीवास्तव ने की। उन्होंने पत्रकारिता की विश्वसनीयता और सामाजिक सरोकारों को बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि पुलिस और मीडिया के बीच स्वस्थ संबंध लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक हैं।
जिला सूचना अधिकारी अनिल कुमार सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल, असहमति और अलग-अलग विचार स्वाभाविक हैं। पत्रकार का सवाल पूछना उसकी जिम्मेदारी है, लेकिन सवाल के साथ संवाद और संतुलन भी जरूरी है। जिम्मेदार अधिकारियों को भी पत्रकारों से संवाद करना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी देते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
एलबीएस पीजी कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. शैलेन्द्र नाथ मिश्र ने कहा कि किसी खबर अथवा घटना को लेकर पत्रकार और पुलिस की अपनी-अपनी दृष्टि हो सकती है। ऐसी स्थिति में संवाद के माध्यम से तथ्य स्पष्ट करना सबसे बेहतर रास्ता है। वहीं परसपुर विकास मंच के संयोजक अरुण सिंह ने कहा कि बातचीत बंद होने से दूरी बढ़ती है, जबकि संवाद बना रहने से समाधान का रास्ता निकलता है।
सोशल मीडिया के दौर में बढ़ी जिम्मेदारी
वरिष्ठ पत्रकार के पूर्व डीजीसी राजस्व वेद प्रकाश श्रीवास्तव ने एवं अन्य वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध अभियान चलाना नहीं, बल्कि सही तथ्यों और जनहित के मुद्दों को समाज के सामने रखना होना चाहिए। पुलिस एवं प्रशासन से भी पत्रकारों और आमजन की बात गंभीरता से सुनने की अपेक्षा जताई गई।
इस अवसर पर उपजा की जिला इकाई की ओर से प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जीसी श्रीवास्तव, मुख्य वक्ता डॉ. सूर्यपाल सिंह, प्रोफेसर डॉ. शैलेन्द्र नाथ मिश्र, पूर्व डीजीसी वेद प्रकाश श्रीवास्तव, पत्रकार पीपी यादव, पंकज कुमार सिन्हा, महाराणा प्रताप सिंह राही और नीता सिंह सहित लगभग एक दर्जन वक्ताओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता/पत्रकार प्रमोद नंदन एवं संयोजक अधिवक्ता/पत्रकार रामफेर प्रजापति ने किया। इस दौरान एनयूजे इंडिया के पूर्व सदस्य अनूप श्रीवास्तव, उपजा के प्रदेश सचिव जगपाल सिंह, उपाध्यक्ष मनोज श्रीवास्तव, वियोगी पंकज, शैलेन्द्र कौशल, अवधराज गोस्वामी, राकेश सिंह, गिरधारी प्रजापति, मुरली मनोहर, रवि यादव, सैफ, डॉ. आकाश श्रीवास्तव सहित दर्जनों पत्रकार मौजूद रहे।
अंत में उपजा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जीसी श्रीवास्तव ने अतिथियों, वक्ताओं एवं पत्रकार साथियों का आभार व्यक्त किया।




