प्लास्टिक का अदृश्य खतरा: हमारी थाली में छिपा माइक्रोप्लास्टिक
प्लास्टिक का अदृश्य खतरा: हमारी थाली में छिपा माइक्रोप्लास्टिक
विशेष रिपोर्ट | टेक डेस्क
जब भी हम प्लास्टिक प्रदूषण की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में नदियों में तैरती बोतलें, कचरे के पहाड़ या समुद्र में फंसे जीवों की तस्वीरें आती हैं। लेकिन इस समस्या का एक सबसे खतरनाक पहलू वह है, जो नग्न आंखों से दिखाई नहीं देता — माइक्रोप्लास्टिक।
5 मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक के ये कण अब हमारे पीने के पानी, खाने की चीजों, घर की धूल और यहां तक कि इंसानी शरीर में भी पाए जा रहे हैं।
किन माध्यमों से शरीर में पहुंच रहा है माइक्रोप्लास्टिक?
* चाय की थैलियां (Tea Bags): कई फैंसी या पिरामिड शेप वाले टी-बैग्स में PET या पॉलीप्रोपाइलीन जैसे सिंथेटिक पॉलिमर का इस्तेमाल होता है। गर्म पानी में डालते ही इनसे लाखों माइक्रोप्लास्टिक कण निकलते हैं।
* उपाय: खुली चाय की पत्ती और स्टेनलेस स्टील की छन्नी का इस्तेमाल करें।
* सॉफ्ट ड्रिंक कैन (Aluminium Cans): एल्युमीनियम के डिब्बों में अंदर की तरफ प्लास्टिक/पॉलिमर की एक बेहद पतली परत चढ़ाई जाती है, ताकि पेय पदार्थ धातु से सीधे संपर्क में न आए। तापमान और एसिडिटी के कारण इसके कण भी भोजन में मिल सकते हैं।
* समुद्री नमक (Sea Salt): समुद्र के पानी में फैले प्लास्टिक के कारण अब समुद्री नमक में भी माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए जा रहे हैं।
* कपड़े और घर की धूल: पॉलिएस्टर, नायलन और एक्रिलिक जैसे सिंथेटिक कपड़ों को पहनने और धोने के दौरान छोटे-छोटे रेशा (माइक्रोफाइबर) हवा और घर की धूल में घुल जाते हैं।
घबराहट नहीं, सावधानी और सही जानकारी है जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन से प्लास्टिक को पूरी तरह खत्म करना न तो व्यावहारिक है और न ही आवश्यक। मेडिकल क्षेत्र से लेकर खाद्य सुरक्षा तक में पॉलिमर का बड़ा योगदान है। जरूरत डरने की नहीं, बल्कि सही आदतें अपनाने की है:
* कांच या सिरेमिक का इस्तेमाल: भोजन को गर्म करने के लिए प्लास्टिक के बजाय कांच या मिट्टी/सिरेमिक के बर्तनों का प्रयोग करें।
* पुराने बर्तनों को बदलें: कटे-फटे या खराब हो चुके प्लास्टिक कंटेनरों का इस्तेमाल तुरंत बंद करें।
* घर की सफाई: घर में धूल जमा न होने दें। HEPA फिल्टर वाले वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल बारीक कणों को हटाने में मदद करता है।
* प्राकृतिक कपड़े: जहां संभव हो सूती (Cotton), सूती-ऊनी या लिनेन जैसे प्राकृतिक कपड़ों का चयन करें।
> “लक्ष्य ‘प्लास्टिक-मुक्त दुनिया’ बनाना नहीं, बल्कि ऐसा समाज बनाना है जहां पॉलिमर का इस्तेमाल जिम्मेदारी और समझदारी से हो।”
> — शौर्य गुप्ता, अंतिम वर्ष के छात्र (पॉलिमर इंजीनियरिंग, ICT मुंबई)
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