नरैनी में यूजीसी नियमों के विरोध में प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

आरक्षण में आर्थिक आधार को महत्व देने और समान अवसर आयोग के गठन की मांग, कई प्रमुख मुद्दे उठाए

जिला ब्यूरो चीफ सुशील कुमार मिश्रा की रिपोर्ट नरैनी, बांदा। यूजीसी के नियमों, आरक्षण व्यवस्था और समान अवसर से जुड़े मुद्दों को लेकर सोमवार को नरैनी तहसील में राष्ट्रपति के नाम उपजिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नियमों की समीक्षा और विवादित प्रावधानों में आवश्यक संशोधन अथवा उन्हें वापस लेने की मांग की।ज्ञापन में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के दुरुपयोग की शिकायतों में निर्दोष नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा, आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक स्थिति को भी महत्व देने तथा सामान्य वर्ग के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सवर्ण आयोग अथवा समान अवसर आयोग के गठन की मांग प्रमुखता से उठाई गई।सोनू करवरिया ने प्रावधान वापस लेने की मांग कीकार्यक्रम में सोनू करवरिया ने कहा कि उनके अनुसार सवर्ण और अन्य जातियों के बच्चों के बीच विवाद की स्थिति पैदा करने वाले प्रावधान को वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस मामले में पुनर्विचार की मांग की।आदित्य प्रताप सिंह के बयान पर चर्चाआदित्य प्रताप सिंह ने संबंधित कानून को “काला कानून” बताते हुए कहा, “बिना कुछ किए अगर जेल जाना है तो कुछ करके जाना ही उचित होगा।” उन्होंने कहा कि यदि सरकारें मांगों पर विचार नहीं करतीं तो युवा अपने रास्ते अलग कर सकते हैं और इससे कानून-व्यवस्था के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है।रोहित पाठक बोले—मांगें नहीं मानीं तो लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगेरोहित पाठक ने कहा कि यदि सरकार यूजीसी के नियमों को वापस नहीं लेती है तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से सरकार को जवाब देगी। उन्होंने इसे विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताया।उमेश तिवारी ने कहा—समान अवसर की मांगउमेश तिवारी ने कहा कि उनकी मांग किसी वर्ग के अधिकारों के खिलाफ नहीं है। उनका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए न्यायपूर्ण और समान अवसर सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि मांगों को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से सरकार के समक्ष रखा जा रहा है।आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक स्थिति को शामिल करने की मांगज्ञापन में कहा गया कि आरक्षण व्यवस्था में सामाजिक परिस्थितियों के साथ आय, संपत्ति, आर्थिक स्थिति, शैक्षणिक परिस्थिति और वास्तविक आवश्यकता जैसे प्रमाणित मानकों को भी उचित महत्व दिया जाना चाहिए। सामान्य वर्ग के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर नागरिकों के लिए शिक्षा, छात्रवृत्ति, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान की भी मांग की गई।ज्ञापन कार्यक्रम में सोनू करवरिया, प्रदीप करवरिया, आदित्य प्रताप सिंह, आनंद पांडेय, रोहित पाठक, जीतू त्रिपाठी, अमित सिंह, विश्वनाथ मिश्रा, कामता प्रसाद मिश्रा, अखिलेश गुप्ता, संतराम गुप्ता, शुभम शुक्ला, सचिन सिंह, सौरभ शर्मा, कुलदीप मिश्रा, अन्नू रलिहा, जागेश्वर प्रसाद पांडेय, पप्पू करवरिया समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी मांगें लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से राष्ट्रपति एवं सरकार के समक्ष रखी गई हैं और संबंधित विषयों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक निर्णय लिए जाने की अपेक्षा है।

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