प्रशासनिक लश्कर के साथ खेतों की पगडंडी पर उतरे DM, बाढ़ और बारिश से हुई फसल क्षति का लिया जायजा

प्रशासनिक लश्कर के साथ खेतों की पगडंडी पर उतरे DM, बाढ़ और बारिश से हुई फसल क्षति का लिया जायजा
* घाघरा नदी खतरे के निशान के पार; कैसरगंज तहसील के प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे जिलाधिकारी और SP
* DM राजेश कुमार पाण्डेय का सख्त निर्देश: 72 घंटे के भीतर कराएं सर्वे, किसानों को मिले त्वरित मुआवजा
बहराइच। नेपाल के पहाड़ी इलाकों और जनपद में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश के चलते नदियों के उफान और जलभराव की स्थिति का जायजा लेने जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय खुद धरातल पर उतरे। रविवार को प्रशासनिक अमले के साथ कैसरगंज तहसील पहुंचे डीएम ने खेतों की पगडंडियों पर पैदल चलकर बारिश और बाढ़ से धान, गन्ना और केले की फसलों को हुए नुकसान का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उन्हें सतर्क रहने की अपील की।
संजय सेतु पहुंच घाघरा के जलस्तर का निरीक्षण
भ्रमण के दौरान जिलाधिकारी ने पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव और मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार धनवंता के साथ घाघराघाट स्थित संजय सेतु का निरीक्षण किया। मौके पर अधिकारियों ने बताया कि एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 मीटर को पार कर 106.14 मीटर पर पहुंच गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए डीएम ने सभी एसडीएम और संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार गश्त करने और तटवर्ती इलाकों में पैनी नजर बनाए रखने के निर्देश दिए।
‘अनावश्यक पानी में न जाएं, बच्चों का रखें ध्यान’
जनसंवाद के दौरान जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को ढांढस बंधाया और कहा कि संकट की इस घड़ी में शासन-प्रशासन पूरी तरह उनके साथ है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अनावश्यक रूप से पानी के बहाव में न जाएं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति विशेष सतर्कता बरतें। डीएम ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देशों के अनुसार दैवीय आपदा से पीड़ितों को तत्काल राहत पहुंचाना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है।
पारदर्शी सर्वे के निर्देश, 72 घंटे में दें फसल नुकसान की सूचना
खेतों में फसलों की बर्बादी देखकर डीएम ने राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमों को तत्काल स्थलीय निरीक्षण और निष्पक्ष सर्वे करने के आदेश दिए।
* पारदर्शिता का निर्देश: सर्वे में पूरी पारदर्शिता बरती जाए ताकि कोई भी वास्तविक पीड़ित किसान मुआवजे से वंचित न रहे।
* फसल बीमा का लाभ: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़े किसानों को सलाह दी गई कि वे किसी भी स्थानीय आपदा या फसल क्षति की सूचना 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी, बैंक, कृषि विभाग या टोल-फ्री नंबर 14447 पर अनिवार्य रूप से दर्ज कराएं।
* जरूरी दस्तावेज रखें तैयार: टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराते समय किसान अपना केसीसी नंबर, फसल बीमा पॉलिसी नंबर, फसल का नाम, क्षेत्रफल और क्षति का विवरण अपने पास तैयार रखें।
आपातस्थिति के लिए कंट्रोल रूम जारी
जिलाधिकारी ने आमजन से अपील की है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति या जलभराव की समस्या होने पर तुरंत तहसील प्रशासन या जिला आपदा कंट्रोल रूम के दूरभाष नंबर 230132 अथवा टोल-फ्री नंबर 1077 पर सूचना दें।

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