नाबालिग से यौन अपराध के मामले में बहराइच पुलिस की प्रभावी पैरवी: आरोपी को 20 वर्ष का कठोर कारावास व 54,000 रुपये का अर्थदंड

बदलता स्वरूप बहराइच
नाबालिग से यौन अपराध के मामले में बहराइच पुलिस की प्रभावी पैरवी: आरोपी को 20 वर्ष का कठोर कारावास व 54,000 रुपये का अर्थदंड
बहराइच। उत्तर प्रदेश में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत बहराइच पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। नाबालिग किशोरी के साथ यौन अपराध और धमकी देने के मामले में माननीय बाल न्यायालय/अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ने त्वरित सुनवाई करते हुए अभियुक्त आलोक को दोषसिद्ध ठहराया है। अदालत ने अभियुक्त को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 54,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
क्या था मामला?
वर्ष 2022 में थाना दरगाह शरीफ क्षेत्र के अंतर्गत वादी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि अभियुक्त आलोक (पुत्र श्रीकांत चौहान, निवासी ऊचवा पुरैनी) उसकी 15 वर्षीय नाबालिग बहन को बहला-फुसलाकर उसके साथ गलत कृत्य करता था और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देता था। पुलिस ने मामले में धारा 376, 506, 120B भादवि के तहत मुकदमा दर्ज किया।
तत्कालीन विवेचक उप-निरीक्षक राजेश्वर सिंह द्वारा साक्ष्य संकलन व गवाहों के बयानों के आधार पर अभियुक्त के विरुद्ध धारा 376, 504, 506 भादवि व 5(जे)(ii)/6 पॉक्सो एक्ट में आरोप-पत्र प्रेषित किया गया।
बाल न्यायालय को भेजा गया था मामला
घटना के समय अभियुक्त के ‘विधि का उल्लंघन करने वाले बालक’ पाए जाने पर प्रकरण किशोर न्याय बोर्ड, बहराइच को प्रेषित किया गया था। अपराध की गंभीरता को देखते हुए किशोर न्याय बोर्ड ने प्रारंभिक मूल्यांकन के बाद 3 सितंबर 2024 को मामला बाल न्यायालय को संदर्भित किया। बाल न्यायालय ने साक्ष्यों व तथ्यों पर विचार करते हुए अभियुक्त को दोषी पाया। चूंकि घटना के समय अभियुक्त बालक था, इसलिए दंड का निष्पादन ‘किशोर न्याय अधिनियम, 2015’ के प्रावधानों के तहत किया जाएगा।
सजा का विवरण
अदालत ने दोषी आलोक को निम्नलिखित सजा सुनाई है:
* धारा 6 पॉक्सो एक्ट: 20 वर्ष का कठोर कारावास और ₹50,000 का अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास)।
* धारा 504 भादवि: 2 वर्ष का कारावास और ₹2,000 का अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1 माह का अतिरिक्त कारावास)।
* धारा 506 भादवि: 3 वर्ष का कारावास और ₹2,000 का अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1 माह का अतिरिक्त कारावास)।
पुलिस महानिदेशक उ.प्र. एवं पुलिस अधीक्षक बहराइच के निर्देशन में मॉनिटरिंग सेल, विशेष लोक अभियोजक और थाना पैरोकार की मजबूत व प्रभावी पैरवी के कारण न्यायालय ने यह त्वरित और सख्त फैसला सुनाया है।
नाबालिग से यौन अपराध के मामले में बहराइच पुलिस की प्रभावी पैरवी: आरोपी को 20 वर्ष का कठोर कारावास व 54,000 रुपये का अर्थदंड
बहराइच। उत्तर प्रदेश में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत बहराइच पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। नाबालिग किशोरी के साथ यौन अपराध और धमकी देने के मामले में माननीय बाल न्यायालय/अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ने त्वरित सुनवाई करते हुए अभियुक्त आलोक को दोषसिद्ध ठहराया है। अदालत ने अभियुक्त को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 54,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
क्या था मामला?
वर्ष 2022 में थाना दरगाह शरीफ क्षेत्र के अंतर्गत वादी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि अभियुक्त आलोक (पुत्र श्रीकांत चौहान, निवासी ऊचवा पुरैनी) उसकी 15 वर्षीय नाबालिग बहन को बहला-फुसलाकर उसके साथ गलत कृत्य करता था और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देता था। पुलिस ने मामले में धारा 376, 506, 120B भादवि के तहत मुकदमा दर्ज किया।
तत्कालीन विवेचक उप-निरीक्षक राजेश्वर सिंह द्वारा साक्ष्य संकलन व गवाहों के बयानों के आधार पर अभियुक्त के विरुद्ध धारा 376, 504, 506 भादवि व 5(जे)(ii)/6 पॉक्सो एक्ट में आरोप-पत्र प्रेषित किया गया।
बाल न्यायालय को भेजा गया था मामला
घटना के समय अभियुक्त के ‘विधि का उल्लंघन करने वाले बालक’ पाए जाने पर प्रकरण किशोर न्याय बोर्ड, बहराइच को प्रेषित किया गया था। अपराध की गंभीरता को देखते हुए किशोर न्याय बोर्ड ने प्रारंभिक मूल्यांकन के बाद 3 सितंबर 2024 को मामला बाल न्यायालय को संदर्भित किया। बाल न्यायालय ने साक्ष्यों व तथ्यों पर विचार करते हुए अभियुक्त को दोषी पाया। चूंकि घटना के समय अभियुक्त बालक था, इसलिए दंड का निष्पादन ‘किशोर न्याय अधिनियम, 2015’ के प्रावधानों के तहत किया जाएगा।
सजा का विवरण
अदालत ने दोषी आलोक को निम्नलिखित सजा सुनाई है:
* धारा 6 पॉक्सो एक्ट: 20 वर्ष का कठोर कारावास और ₹50,000 का अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास)।
* धारा 504 भादवि: 2 वर्ष का कारावास और ₹2,000 का अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1 माह का अतिरिक्त कारावास)।
* धारा 506 भादवि: 3 वर्ष का कारावास और ₹2,000 का अर्थदंड (अर्थदंड न देने पर 1 माह का अतिरिक्त कारावास)।
पुलिस महानिदेशक उ.प्र. एवं पुलिस अधीक्षक बहराइच के निर्देशन में मॉनिटरिंग सेल, विशेष लोक अभियोजक और थाना पैरोकार की मजबूत व प्रभावी पैरवी के कारण न्यायालय ने यह त्वरित और सख्त फैसला सुनाया है।



