भारत-नेपाल सीमा पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई से भड़के ग्रामीण, तहसील परिसर में प्रदर्शन कर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

भारत-नेपाल सीमा पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई से भड़के ग्रामीण, तहसील परिसर में प्रदर्शन कर एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
नानपारा (बहराइच)। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित गांवों में प्रशासन की दोहरी नीति और खुलेआम पनप रहे अवैध कारोबार को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। एक ओर जहां नियमों का हवाला देकर गरीब ग्रामीणों की परचून की दुकानें बंद करवा दी गई हैं, वहीं दूसरी ओर सीमा से महज 50 मीटर की दूरी पर खाद-बीज की आड़ में नशीले पदार्थों की तस्करी का खेल धड़ल्ले से जारी है। इसी दोहरे रवैये से आक्रोशित ग्रामीणों ने नानपारा तहसील परिसर में जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
परचून की दुकानें बंद, तस्कर की दुकान गुलजार
रूपईडीहा थाना क्षेत्र के ग्राम नरैनापुर व रामपुर हुसैन बख्श निवासी पेशकार ने स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने नियमों का भय दिखाकर ग्रामीणों की छोटी-मोटी दुकानें बंद करवा दी हैं, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इसके विपरीत, दूसरे थाने (दौलतपुर) का रहने वाला एक व्यक्ति सीमा से सटकर खाद-बीज की दुकान चला रहा है। आरोप है कि इस दुकान की आड़ में बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों और अन्य सामानों की तस्करी की जा रही है, लेकिन प्रशासन ने उस पर आंखें मूंद रखी हैं।
तहसील परिसर में नारेबाजी, अफरा-तफरी का माहौल
अपराह्न लगभग डेढ़ बजे से ज्ञापन देने के लिए बैठे ग्रामीणों का सब्र जब शाम चार बजे तक जवाब दे गया, तो वे आक्रोशित होकर प्रदर्शन करने लगे। तहसील परिसर में महिलाओं की भारी मौजूदगी और उग्र नारेबाजी से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
एसडीएम ने दिया कड़ी कार्रवाई का भरोसा
हंगामे की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी प्रकाश सिंह ने ग्रामीणों से ज्ञापन लिया और अपने चैंबर में बुलाकर पेशकार से पूरे मामले की जानकारी ली। एसडीएम ने ग्रामीणों को निष्पक्ष जांच कराकर दोषी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
पूर्व सांसद की अनदेखी रही चर्चा का विषय
प्रदर्शन के दौरान तहसील परिसर में एक पूर्व सांसद भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने पीड़ित ग्रामीणों की सुध लेना या मामले को जानना मुनासिब नहीं समझा। जनप्रतिनिधि की इस उपेक्षा को लेकर भी तहसील परिसर में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त रहीं। ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही तस्कर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न हुई और उन्हें रोजगार की अनुमति न मिली, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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