‘दक्षिण भारत में हिंदी’ विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद संपन्न

गोंडा, 2 सितंबर। श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज, गोंडा के ललिता शास्त्री सभागार में बुधवार को पूर्वापर पत्रिका के 18वें अधिवेशन के अवसर पर ‘दक्षिण भारत में हिंदी’ विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दक्षिण भारत में हिंदी भाषा एवं साहित्य के विकास, संवर्धन, प्रचार-प्रसार, वर्तमान स्थिति तथा भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर विचार-विमर्श करना था।

कार्यक्रम में केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश सहित दक्षिण भारत के चार राज्यों से हिंदी भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 16 हिंदीसेवी एवं विद्वान गणमान्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य श्री जितेंद्र सिंह, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. जय शंकर तिवारी, पूर्वापर पत्रिका के संरक्षक श्री सूर्यपाल सिंह, हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेन्द्र नाथ मिश्र, प्रो. रंजन शर्मा, प्रो. संदीप श्रीवास्तव, प्रो. मंशाराम वर्मा, डॉ. हरीश शुक्ल, डॉ. ममता शुक्ला सहित महाविद्यालय परिवार के सदस्यों ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर दक्षिण भारत से आए सभी 16 हिंदी-सेवियों का सम्मान किया गया तथा विभिन्न पुस्तकों का विमोचन भी संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में महाविद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया। इसके पश्चात ‘दक्षिण भारत में हिंदी’ विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद का द्वितीय सत्र आयोजित हुआ।

परिसंवाद में डॉ. आर. सुरेंद्रन ने बीज वक्तव्य देते हुए दक्षिण भारत में हिंदी की स्थिति तथा दक्षिण भारत की प्रमुख भाषाओं के साथ हिंदी के संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने हिंदी और दक्षिण भारतीय भाषाओं के बीच साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संवाद को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर डॉ. सूर्यपाल सिंह तथा प्रो. शैलेन्द्र नाथ मिश्र ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया कि उत्तर भारत में जिस प्रकार उच्च वर्ग के परिवारों में बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा दिलाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, क्या दक्षिण भारत में भी ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हो रही है? वक्ताओं ने कहा कि इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है, अन्यथा अंग्रेजी का बढ़ता प्रभाव हिंदी सहित भारतीय भाषाओं के लिए चुनौती बन सकता है और हमारी मातृभाषाएँ धीरे-धीरे पीछे छूट सकती हैं।

श्रीनिवास राव, अध्यक्ष, अंग्रेजी विभाग, एलबीएस ने आंध्र प्रदेश में हिंदी की स्थिति पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि वे विभिन्न रचनाओं का तेलुगु में अनुवाद कर रहे हैं, ताकि हिंदी की महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियों को तेलुगु भाषी पाठकों तक पहुँचाया जा सके।

परिसंवाद में श्रीजा प्रमोद, डॉ. ओ. वासवन, डॉ. वी. विजय कुमार तथा डॉ. रतीश निराला ने भी दक्षिण भारत में हिंदी की स्थिति, संभावनाओं और चुनौतियों पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में महाविद्यालय परिवार एवं पूर्वापर परिवार के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। प्रो. मंशाराम वर्मा, प्रो. अमन चंद्रा, प्रो. संदीप श्रीवास्तव, डॉ. ममता शुक्ला, डॉ. हरीश शुक्ला, डॉ. नीरज, डॉ. रंजन शर्मा, डॉ. पुष्यमित्र, डॉ. मुक्ता टंडन, पिंकी शुक्ला, गुड़िया तिवारी सहित एमए एवं बीए के छात्र-छात्राओं ने अपनी सक्रिय उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। महाविद्यालय के कर्मचारी राम भरोस, दीपू, शंकर दयाल, देवेंद्र, रमेश आदि ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

कार्यक्रम ने दक्षिण भारत में हिंदी के प्रति सक्रियता, हिंदी और दक्षिण भारतीय भाषाओं के बीच संवाद तथा भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता को रेखांकित किया।

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