जिला कारागार में बंदी की संदिग्ध मौत, परिजनों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग

जेल प्रशासन व उपचार प्रक्रिया पर उठाए सवाल, एसपी से एफआईआर और साक्ष्य सुरक्षित कराने की मांग

रिपोर्ट महेश गोस्वामी बदलता स्वरूप गोंडा। जिला कारागार गोंडा में निरुद्ध रामगनेश पुत्र राम लखन की उपचार के दौरान हुई मृत्यु को लेकर परिजनों ने गंभीर आशंका जताते हुए पुलिस अधीक्षक से उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र में जेल में उपचार, दवाओं तथा अस्पताल में ऑपरेशन की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं।प्रार्थना पत्र के अनुसार रामगनेश अभियोग संख्या 151/2019, धारा 307, 504, 506 एवं एससी/एसटी एक्ट से संबंधित मामले में 28 जून 2026 से जिला कारागार गोंडा में निरुद्ध थे। जेल में उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें लखनऊ मेडिकल कॉलेज/केजीएमयू रेफर किया गया, जहां उनका ऑपरेशन किया गया। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन से पूर्व उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई तथा उनकी सहमति की प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल हैं।परिजनों ने यह भी आशंका जताई है कि जेल में भोजन अथवा अन्य माध्यम से किसी विषैले पदार्थ का सेवन कराए जाने की संभावना की जांच होनी चाहिए। प्रार्थना पत्र में जेल मुलाकात के दौरान उनके बेहोश होने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।परिजनों ने जेल प्रशासन के संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों, चिकित्सकों तथा मुकदमे से जुड़े विपक्षी पक्ष के कुछ लोगों की कथित मिलीभगत और उपचार में लापरवाही की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि मृत्यु के बाद अस्पताल में कुछ परिस्थितियां ऐसी बनीं, जिनसे परिवार की शंकाएं और बढ़ गईं।पीड़ित के अनुसार घटना के संबंध में लखनऊ के चौक क्षेत्र स्थित मेडिकल कॉलेज थाने में भी प्रार्थना पत्र देकर जानकारी दी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब पुलिस अधीक्षक गोंडा से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच, प्रथम दृष्टया अपराध पाए जाने पर एफआईआर, जेल के मेडिकल रिकॉर्ड एवं दवा रजिस्टर सुरक्षित कराने, अस्पताल के ऑपरेशन व उपचार संबंधी अभिलेखों की जांच तथा उपलब्ध विसरा/नमूनों की फोरेंसिक एवं टॉक्सिकोलॉजी जांच कराने की मांग की गई है।इसके अलावा जेल एवं अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज, विजिटर रिकॉर्ड, कॉल डिटेल से संबंधित उपलब्ध साक्ष्य तथा अन्य अभिलेख सुरक्षित कराने की मांग की गई है, ताकि जांच के दौरान किसी प्रकार के साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके। परिजनों का कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही रामगनेश की मृत्यु की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

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