इंटीग्रल विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन टीजी-स्मार्ट 2026 का समापन

सतत निर्माण सामग्री और मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेषज्ञों ने किया मंथन
बदलता स्वरूप लखनऊ। इंटीग्रल विश्वविद्यालय, लखनऊ में परिवहन भू-तकनीकी, सतत निर्माण सामग्री तथा उन्नत, टिकाऊ और मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टीजी-स्मार्ट 2026’ का शनिवार को समापन हुआ। विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से 8 से 10 अक्टूबर तक आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और पेशेवरों ने भाग लेकर आधुनिक निर्माण तकनीकों, पर्यावरण-अनुकूल सामग्री तथा बुनियादी ढांचे को अधिक टिकाऊ और मजबूत बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।सम्मेलन का आयोजन भारतीय भू-तकनीकी सोसाइटी, लखनऊ शाखा के सहयोग से किया गया, जबकि वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान ने तकनीकी भागीदार के रूप में सहयोग दिया। कार्यक्रम के दौरान बुनियादी ढांचे से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों के समाधान के लिए नवाचार, उन्नत इंजीनियरिंग तकनीकों और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष एवं सम्मेलन संयोजक प्रो. सैयद अकील अहमद ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन की गतिविधियों और उद्देश्यों की जानकारी दी। विश्वविद्यालय के कुलपति एवं सम्मेलन अध्यक्ष प्रो. फुरकान कमर ने सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सिविल इंजीनियरों ने प्राचीन काल से ही सभ्यताओं के निर्माण, बुनियादी ढांचे के विकास और सामाजिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता भी रेखांकित की।
उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग के तकनीकी सलाहकार विजय कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे का विकास समाज की आवश्यकताओं और जनकल्याण को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने ज्ञान सृजन, उद्योगोन्मुखी अनुसंधान और कुशल पेशेवरों को तैयार करने में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।लखनऊ स्थित इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो. वीरेंद्र पाठक विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था में बुनियादी ढांचे की अहमियत बताते हुए सम्मेलन को सफल बनाने में आयोजकों और प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की।समापन सत्र में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुपति के प्रो. रामनाथन अयोथिरामन, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, वारंगल के प्रो. आरिफ अली बेग मोगल तथा विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं सम्मेलन के सह-संरक्षक प्रो. मोहम्मद हारिस सिद्दीकी ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने परिवहन भू-तकनीकी और सतत निर्माण के क्षेत्र में हो रहे नवीन शोध, तकनीकी विकास तथा भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की।सम्मेलन के दौरान परिवहन भू-तकनीकी के उभरते क्षेत्रों में उत्कृष्ट शोध करने वाले प्रतिष्ठित संस्थानों और संगठनों से जुड़े युवा शोधकर्ताओं को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों के माध्यम से शोध की गुणवत्ता, मौलिकता और उत्कृष्टता को प्रोत्साहित किया गया।सम्मेलन का समापन सतत विकास, पर्यावरण-अनुकूल निर्माण और भविष्य की बुनियादी ढांचा संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए विशेषज्ञों के बीच सहयोग, नवाचार तथा गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ हुआ।



