कांग्रेस पार्टी बांदा के पदाधिकारियों ने संधियों के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आवाह्न पर व उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष माननीय अजय राय पूर्व मंत्री के निर्देशन पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित के नेतृत्व में भेदभाव के खिलाफ लड़ने पर राहुल गांधी के खिलाफ संघी ने जो FIR कराई है ।

बांदा(उप्र), अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आवाह्न पर व उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष माननीय अजय राय पूर्व मंत्री के निर्देशन पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित के नेतृत्व में भेदभाव के खिलाफ लड़ने पर राहुल गांधी के खिलाफ संघी ने जो FIR कराई है ।
वह राजनैतिक द्वेष भाव से पूर्ण है, कांग्रेस पार्टी इसको अनैतिक व अनुचित मानते हुए इसका विरोध करती है। भाजपा-संघ को उखाड़े बिना भेदभाव, छुआछूत और अपमान से आजादी नहीं मिलेगी। इस विषय को लेकर जिला कांग्रेस कार्यालय से लेकर रेलवे स्टेशन तक विरोध प्रदर्शन किया गया।

बांदा कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने मीडिया से रूबरू होते हुए बतलाया कि “जननेता राहुल गांधी पर FIR हो गई है, पता है क्यूँ क्योंकि उन्होंने देश के सीनियर दलित नेता के साथ हुए जातिगत भेदभाव पर आरएसएस और भाजपा को नंगा किया था!

उन्होंने हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण के बाद मंच के जातिगत आधार पर शुद्धिकरण का विरोध किया था।

क्या अब संघियों–भाजपाइयों के राज में भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ लड़ाई लड़ना भी अपराध हो चुका है?

ये संघी ये भूल रहे हैं कि आजादी से पहले जो गांधी जी व दलितों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ते थे, आज आजादी के 79 साल बाद उसी गांधी के वंशज राहुल गांधी को दलितों के सम्मान की लड़ाई लड़ने के बदले मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है।

लेकिन ये राहुल गांधी है, ये फ्लावर नहीं फायर है अगर इन्होंने ठान लिया है तो देश को संघी भेदभाव जातिगत छुआछूत से आजादी दिला कर ही रहेंगे। और यह आजादी कब मिलेगी जब इस देश से बीजेपी और आरएसएस जड़ से उखड़ जाएगा। क्योंकि जब तक इस देश में आरएसएस और भाजपा रहेगी, तब तक इस देश के दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और महिलाओं को इंसाफ किसी कीमत पर नहीं मिल सकता।

अगर शोषितों और वंचितों को भेदभाव और छुआछूत से आजादी चाहिए, अगर समानता और सम्मान के साथ जीने का अधिकार चाहिए तो सबसे पहले भाजपा औऱ संघ को उखाड़ना होगा। क्योंकि सारी बुराईयों, कुरीतियों और पाखंड की जड़ संघी और भाजपाई हैं।

आप खुद सोचिए कि जब इस देश में राज्यसभा के नेता विपक्ष भेदभाव और छुआछूत से सुरक्षित नहीं है तो आम गरीब जनता की बात क्या ही करें।

दलितों के प्रति संघियों की घृणा का अंदाजा इस बात से लगा लीजिए कि बीते दिनांक 08 अगस्त 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी एक जनसभा को संबोधित करने के लिए उत्तराखंड के हल्द्वानी गए थे। यहां एक रामलीला मंच पर जनसभा को संबोधित करने के बाद खरगे जी जैसे ही मंच से उतरे, उसके महज कुछ ही घंटे बाद तमाम संघी स्वयंसेवक और भाजपाई कार्यकर्ताओं ने रामलीला मंच पर हवन करके उस मंच का शुद्धिकरण किया।

पता है क्यों क्योंकि खरगे जी दलित हैं। इन संघियों की नजर में दलित इंसान नहीं होते है।

ये वही संघी और भाजपाई हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बंगले में जाने से पहले उस बंगले को गंगाजल से धुलवाया था। क्योंकि इससे पहले उस बंगले में अखिलेश यादव के रूप में एक पिछड़ा मुख्यमंत्री रहता था।

पिछड़ों और दलितों के प्रति भाजपा की सोच बहुत जहरीली है। ये लोग दलितों और पिछड़ों को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते।

एक बात और कि खुद को ओबीसी बताकर वोट मांगने वाले नरेंद्र मोदी खुद दलितों-पिछड़ों की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं। वो भले ही चीख-चीख कर खुद को पिछड़ों का मसीहा बताते हैं, मगर उनके कारनामों से साफ लगता है कि मोदी जी का मन और मस्तिष्क दलितों और पिछड़ों के प्रति भेदभाव और संकीर्णता से सना हुआ है।

अगर मोदी जी का इरादा साफ रहा होता तो किस जाहिल संघी और भाजपाई की औकात थी, जो एक दलित नेता के साथ भेदभाव करता, जो पिछड़े मुख्यमंत्री को उसकी जाति के कारण अपमानित करने की हिम्मत करता?

इसलिए आपको समझना पड़ेगा कि संघियों की तरह मोदी का इरादा भी समाज के पिछड़ों, दलितों और शोषित वर्गों को न्याय दिलाना नहीं , बल्कि उनका चुनावी इस्तेमाल करना है। उनके नाम पर केवल वोट लेना है।

बीते दिनों आपने देखा होगा कि कांग्रेस और राहुल गांधी लंबे समय से ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदाय को उनका हक दिलाने के ल‍िए लड़ाई लड़ रहे हैं, मगर प्रधानमंत्री खुलेआम जातिगत जनगणना का विरोध करते रहे हैं। वो चुनाव रैलियों में खुद को ओबीसी जरूर बताते हैं, मगर ओबीसी को न्याय देने की बात पर प्रधानमंत्री कहते हैं कि इस देश में जाति है ही नहीं। क्या अब वो प्रधानमंत्री मल्लिकार्जुन खरगे के अपमान के बाद बता सकते हैं कि देश में जाति है कि नहीं?

दरअसल, प्रधानमंत्री जिस संघ की जिस राजनीतिक पाठशाला से निकले हैं, वो पाठशाला वंचित वर्गों के शोषण की प्रयोगशाला है। उनका चरित्र जिस विचारधारा की देन है, वो विचारधारा ही ओबीसी, दलितों और आदिवासियों की बर्बर शोषक है। ये दिखावे के लिए इन वर्गों का हितैषी बनने का नाटक तो जरूर करते हैं, मगर असलियत में ये इन शोषित वर्गों के शत्रु हैं।

अगर स्वतंत्रता, समता और सम्मान चाहिए तो सबसे पहले भाजपा और संघ को उखाड़ना होगा क्योंकि इनके रहते आपको भेदभाव, छुआछूत, अपमान और शोषण से आजादी नहीं मिल सकती है।”

इस विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में कार्यालय प्रभारी शिवबली सिंह, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष सीमा खान एडवोकेट, पूर्व महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुमन शुक्ला, मुमताज बेगम, युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष आदित्य कुमार सिंह एडवोकेट, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष / संगठन प्रभारी संकटा प्रसाद त्रिपाठी, बल्देव वर्मा, द्वारिकेश सिंह यादव मंडेला, जिला महामंत्री / मीडिया प्रभारी सत्यप्रकाश द्विवेदी एडवोकेट, कालीचरण निगम, शोएब रिजवी, जीतेन्द्र गौरव, बाबूराम निषाद, जिला सचिव हेमन्त कुमार वर्मा, रामखेलावन राजपूत, जिला कंट्रोल रूम प्रभारी बी लाल भाई, बांदा कांग्रेस सोशल मीडिया जिलाध्यक्ष सन्तोष कुमार द्विवेदी, धीरेन्द्र पांडेय धीरू, कृपाशंकर सोनी, आरिफ निजामी, युवा कांग्रेस विधानसभा प्रभारी ईशू फैज खान, अशरफ उल्ला रम्पा, मोहित यादव एडवोकेट, जिला वक्ता राजेश कुमार गुप्ता पप्पू, दिव्यांश वर्मा, सत्यम सिंह, साद खान, फरहान अली, कुलदीप कुमार लालबाबू राजपूत सहित काफी संख्या में कांग्रेसजन शामिल हुए।

जिला ब्यूरो चीफ सुशील कुमार मिश्रा की रिपोर्ट, बांदा से,

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