जिला अस्पताल में ‘पर्चियों का खेल जारी’: सीएमओ-सीएमएस की कार्यशैली पर भी सवाल

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बांदा। जनपद के जिला अस्पताल में लगातार मरीजों को बाहर से दवाएं लिखे जाने की खबरें अक्सर देखने व पढ़ने की मिलती रहती हैं

मामले में मजा तब आया कि सरकार के मंत्री रामकेश निषाद ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण में करीब छह पर्चियां बाहर से दवा खरीदने की मिलीं और सीएमओ ने ‘पर्चियों का खेल’ होने की बात स्वीकारते हुए कार्रवाई का भरोसा दिया।

लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है—जब खेल अस्पताल के भीतर चल रहा था, तो सीएमओ और सीएमएस की निगरानी आखिर किस काम की थी?

क्या सीएमओ-सीएमएस को यह पता नहीं था कि मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं?
अगर पता था तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
और अगर पता नहीं था तो फिर नियमित निरीक्षण और निगरानी की व्यवस्था किसलिए है?
क्या अस्पताल में दवा के स्टॉक और डॉक्टरों की पर्चियों का कभी मिलान किया गया?
मरीजों से बाहर की दवा और रुपये लिए जाने की शिकायतें पहले भी पहुंचीं तो उनका क्या हुआ?क्या शिकायतों की जांच हुई या उन्हें भी सरकारी फाइलों की तरह धूल खाने के लिए छोड़ दिया गया?
सबसे चुभता सवाल यह है कि मंत्री के पांच बजे अचानक पहुंचते ही छह पर्चियां मिल गईं, लेकिन सीएमओ-सीएमएस की नियमित निगाहों के सामने यह खेल क्यों नहीं दिखा? क्या निरीक्षण सिर्फ मंत्री के आने पर ही सक्रिय होता है?
और यदि यह केवल कुछ कर्मचारियों की मनमानी थी, तो उनकी जवाबदेही तय करने में अब तक देरी क्यों हुई? यदि व्यवस्था की कमी थी, तो उस व्यवस्था के संरक्षक अधिकारियों की जिम्मेदारी क्यों नहीं तय होनी चाहिए?पर्ची लिखने वाले कर्मचारी पर कार्रवाई आसान है, लेकिन उस कुर्सी की जवाबदेही तय करना जरूरी है जिस पर पूरे अस्पताल की निगरानी का दायित्व है।अब जनता जानना चाहती है—सीएमओ और सीएमएस सिर्फ कार्रवाई का आश्वासन देंगे या अपनी निगरानी की विफलता का भी जवाब देंगे?

जिला ब्यूरो चीफ सुशील कुमार मिश्रा की रिपोर्ट बांदा से,

दिनांक/06/09/2026

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