साहब पेंशन नहीं आई, महीनों से ठोकर खाए रहे हैं

विधवा और वृद्धा कहां लगाए गुहार, पेंशन की है दरकार

बदलता स्वरूप
नानपारा, बहराइच। “बड़े बुजुर्गों की उंगलियों में कोई ताकत तो ना थी,मगर जब सर झुका,तो कांपते हाथों ने जमाने भर की दौलत दे दी।”ये चंद लाईने उन बुजुर्ग और बेवा महिलाओं के चेहरे मोहरे पर साफ झलकती है कि उनका सहारा और उनकी दौलत जो पेंशन के रूप में आती थी कई महीनों से नहीं आई और उनके कांपते हाथ और घिसते पैर व्यवस्था के आगे बेबस सिर्फ व्यवस्था को कोसते किसी सहारे का इंतजार कर रही है।कुछ ऐसा ही नजारा अब समाधान दिवस में आम हो चला है।जिसमें से एक जुबलीगंज की बेवा सावित्री बेवा प्रकाश कुछ इसी आस में दिवस में पहुंची लेकिन वहां भी उसे आश्वासन ही नजर आया क्योंकि ऊपर अभी या तो पैसा नहीं बताया गया और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने इस ओर देखना ही अपना धर्म समझा।कुछ यही हाल संतोष देवी पत्नी सत्यनारायण का है जो बैंक और विभाग के चक्कर लगाते लगाते थक गई उम्र के 75 पार अब संतोष देवी क्या करें सिर्फ संतोष धरे बैठी है।ये कोई दो ही का किस्सा नहीं।गांव गांव यही हाल है जिसमें से रीता बेवा राम गोपाल निवासिनी मझोव्वा,कृष्णावती बेवा लालजी निवासिनी पचपेड़वा, बेचाना बेवा पुत्ती निवासिनी अग्नुपुरवा,लीलावती बेवा राम सेवक निवासिनी फुलवरिया सभी का दर्द एक है कि कोई सुनत नाय?कृष्णावती का कहना है विधायक हमरे गांव कै लेकिन कोई नाय सुनत है।दिनभर घटना दुर्घटना और बाजार में घूमती मीडिया भी इससे आँखे चुराये अपने दायित्वों का बखूबी निर्वहन कर रही है।अब ये अलग बात है कि समाज कल्याण से लेकर पंच प्रधान तक की चौखट नाप चुकी इन बेवा और बुजुर्ग महिलाओं की आवाज कब और कितने समय में नक्कार खाने में सुनाई देगी जो यक्ष प्रश्न और समय के गर्भ में है?

लीलावती,बेवा राम सेवक फुलवरिया का पेंशन Bechana पत्नी पुत्ती अग्नुपुरवा विधवा पेंशन

छः माह से नहीं मिला

विधवा पेंशन “कृष्णावती बेवा लालजी पचबेदबा रीता बेवा राम गोपाल पेंशन मझोवा

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